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Pandit Jawaharlal Nehru

पं०  जवाहरलाल नेहरू 

स्वर्गीय पंडित  जवाहरलाल नेहरू भारत के प्राण कहे जाते थे।
अमीर घराने के एकलौते सपूत , अमीरी का ठाट -बाट, बहुत ऊँची शिक्षा और शान -शौकत के बाद भी जवाहरलाल जी राष्ट्रप्रेम में इतने मतवाले थे कि जीवन भर देशसेवा के अलावा उन्होंने कुछ नहीं किया।
अपने समय के नेताओं में जवाहरलाल नेहरू सबसे लोकप्रिय राष्ट्रनेता थे।  अंग्रेजो से आजादी की लड़ाई लड़ने में उन्होंने सदा इतनी बहादुरी दिखाई कि आजादी मिलने के बाद उन्हें ही जनता ने स्वतंत्र भारत का प्रथम प्रधान मंत्री चुना और पुरे 17 वर्ष तक वे  प्रधान मंत्री पद पर रह कर देश की उन्नति के लिए प्रयत्नशील रहे।
 जवाहरलाल नेहरू को बच्चो से बहुत प्रेम था।  समूचे देश के बच्चे उन्हें 'चाचा नेहरू' नाम से पुकारते थे।
पं ० नेहरू जैसे महान व्यक्ति संसार में दूसरा न मिलेगा जिसने 25 वर्षो तक आजादी की लड़ाई का नेतृत्व किया और बाद में आजादी की रक्षा व देश की उन्नति में सत्रह वर्ष तक एक ही उत्साह व परिश्रम से कार्य किया हो।
भारतवर्ष के हर बालक को 'चाचा नेहरू 'पर गर्व है।

जन्म - इलाहाबाद ,1 4 नवंबर 1889 

निधन -दिल्ली 27 मई 1964 

राजर्षि टंडन जी

राजर्षि टंडन जी 

ऋषियों जैसी शकल - सूरत में सीधे -सादे वेशभूषा वाले , त्यागी महापुरुष पुरुषोत्तमदास टंडन का नाम भारतवर्ष के चुने हुए आदरणीय नेताओं में बड़े श्रद्धा से लिया जाता है। 
सादगी और कम खर्च में जीवन बिताने का उनका उदाहरण हर देशवासी को ग्रहण करना चाहिए। 
टंडन जी का सम्पूर्ण जीवन त्याग और तपस्या तथा अनुशासन व शिष्टाचार की ओजपूर्ण कहानी रही है। 
बचपन से ही टंडन जी में देशप्रेम की भावना कूट -कूट कर भरी थी।  महामना प० मदनमोहन मालवीय के वे सच्चे शिष्य थे। हिन्दी भाषा के वे बेजोड़ सेवक व पुजारी थे।  हिन्दी की बात को लेकर उनमे और गांधी जी में कभी -कभी मतभेद भी हो जाता था।  लेकिन हिन्दी -प्रेम के आगे उन्होंने कभी किसी की सलाह नहीं मानी। 
मालवीय जी की प्रेरणा की प्रयाग में हिन्दी साहित्य सम्मेलन की उन्होंने स्थापना की और सारा जीवन उसी संस्था के निर्माण में अर्पित कर दिया। 
आप की राष्ट्रीय व हिन्दी सेवाओं के लिए राष्ट्रपति डा० राजेन्द्र प्रसाद ने आप को सन 1961 में 'भारतरत्न ' की उपाधि प्रधान की जो अपने देश की सब से ऊँची उपाधि है।  जनता में टंडन जी  'राजर्षि टंडन' के नाम से प्रसिद्ध थे। 

जन्म - इलाहबाद , 1 अगस्त 1882 
निधन -इलाहबाद, 1 जुलाई 1962

Shri Rajagopalachari

श्री राजगोपालचारी 

         चक्रवर्ती राजगोपालचारी आधुनिक भारत में राजनीति के चाणक्य मने जाते है। 
         भारत को आजादी मिलने पर आप भारत के प्रथम गवर्नर जनरल चुने गए थे। 
         राजा जी जितने चतुर व बुद्धिमान है उतनो ही सादगी से रहते है। एक धोती और कुरता के अलावा कभी किसी ने इन्हें कोई कपड़ा पहने नहीं देखा। इतनी तपस्या और साधना हर के बस की बात नहीं है।  
         इन्हें प्यार व् आदर से लोग केवल 'राजा जी ' नाम से पुकारते है। 
         राजा जी राजनीति में श्रीमती एनीवीसेन्ट के शिष्य है।  आप मद्रास के सर्वश्रेष्ठ वकील माने जाते है। 
          यह प्रसिद्ध है कि राजा जी की दष्टि राजनीति के मैदान में पचासों वर्ष आगे  की बाते देख लेती है।  इसीलिए राजनीति में जब भविष्य की चर्चा राजा जी करते है तो कभी - कभी लोगों को बड़ा आश्चर्य और असंभव - सा लगता है। 
         सन 1954 में आपको 'भारतरत्न ' की उपाधि मिली है 

जन्म - होसुर  (मद्रास ), सन 1879  
निधन - मद्रास , 25 दिसम्बर 1972 




Sarojini Naidu


श्रीमती सरोजिनी नायडू 

          महात्मा गांधी के साथ की आज़ादी को लड़ाई में हिस्सा  लेने वाली महिलाओं में श्रीमती सरोजिनी का बहुत ऊंचा स्थान है।  श्रीमती सरोजिनी नायडू  ने अपना सारा जीवन देशसेवा में ही लगा दिया था।  देशसेवा के अलावा आप भाषण देने में बड़ी पटु थी और अंग्रेजी में कविताएँ भी लिखती थी जिनका भारत के बाहर ब्रिटेन में भी बहुत मान था।  
         
सरोजिनी देवी का जन्म हैदराबाद में हुआ था।  आप बंगाली थी पर अपने जाति - प्रथा तोड़ कर एक मद्रासी डाक्टर गोविन्द राजलू नायडू से शादी की थी। 
          सन 1925 में कानपुर कांग्रेस अधिवेशन की आप अध्यक्षा थी।  आजादी की लड़ाई में कई बार आपने जेलयात्रा  भी की और सदा ही गांधी जी के साथ छाया की तरह रही। 
          भारत को आजादी मिलने के बाद आप उत्तर प्रदेश की गवर्नर नियुक्त हुई थी। आप सर्वप्रथम महिला गवर्नर थी और जीवन के अन्त तक उसी पद पर रही। 
          भारत-कोकिला का सुमधुर भाषण जिसने भी कभी सुना है वह जीवन भर उसे नहीं भूल सकता। 

जन्म - हैदराबाद 13 फरवरी 1879 
निधन - लखनऊ , 1 मार्च 1949 

सरदार वल्ल्भ भाई पेटल



सरदार पटेल 

Image may contain: drawing          सरदार पटेल हमारे राष्ट्रीय आन्दोलन के सबसे वीर नेता थे।  बात -चीत, रहन-सहन , शक्ल - सूरत में पूरे योद्धा। गंभीर , लोहे की मूर्ति जैसी शक्ल। लगता था कि हिमालय की सबसे मजबूत चट्टान काट कर सरदार पटेल का शरीर गढ़ा गया था।
          महात्मा गाँधी के वे बड़े विश्वासी सहयोगी थे।  सत्य और राष्ट्र -प्रेम के लिए जान की बाजी लगाने वाले सरदार वल्ल्भ भाई पेटल जैसा दूसरा 'लौह पुरुष ' और न मिलेगा।
         ये भी बैरिस्ट्री छोड़ कर राष्ट्रीय आन्दोलन में आये थे।  इन्हें लोग गुजरात का शेर कहते थे।  बारदोली सत्यग्रह की सफलता पर गांधी जी ने इन्हें 'सरदार ' की उपाधि दी थी।  फिर तो वे जनता के सरदार ही हो कर रहे।
          देश में जब तक आजादी की लड़ाई चलती रही और आजादी मिलने के बाद भी जब भी देश पर कोई संकट आता और राजेन्द्र बाबू व पं० नेहरू जैसे नेता भी क्षण बर को चिंतित हो उठते तब केवल सरदार पेटल की योद्धा - वृत्ति ही काम आती।
          ऐसे वीर नेता को देश कभी भूल नहीं सकता।

जन्म -कैरा  (गुजरात ),३१ अक्टूबर 1875
निधन -दिल्ली, 15 दिसम्बर 1950 

पं० मदनमोहन मालवीय


पं० मदनमोहन मालवीय 

          महामना पंडित  मदनमोहन मालवीय का चित्र देखो।  यह एक आधुनिक ऋषि की तस्वीर है ।  इसी से महात्मा गांधी उन्हें अपना गुरु और  बड़ा भाई मानते थे ।
         मालवीय जी के जीवन से हमें लगन, परिश्रम व किसी कार्य के प्रति निष्ठा द्वारा सफलता का उपदेश मिलता है ।
         मालवीय जी का बचपन इतनी गरीबी में बीता था की पाठशाला की फीस भी वे समय से नहीं दे पाते थे ।  और जितने कष्ट व परिश्रम से उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की, वह उनको लगन व निष्ठा तथा कर्त्तव्य के प्रति सच्चाई का ही नमूना है । उन्हें अनुभव था कि भारतवर्ष के अधिकांस अच्छे विधार्थी गरीबी के कारण नहीं पढ़ पाते इसीलिए उन्हेंने कशी हिंदू विश्वविदालय की स्थापना की, जो आज सारे संसार के अच्छे विश्वविदालयों में मन जाता है ।
         कशी हिंदू विश्वविदालय के निर्माण में ही उन्होंने अपना सारा जीवन लगा दिया । एक व्यक्ति द्वारा इतनी बड़ी दूसरी संस्था और कहीं नहीं बनी ।
         मालवीय जी से बड़ा देशभग्त भी दूसरा न मिलेगा।  राष्ट्रभाषा हिंदी का उन जैसा दुसरा प्रेमी व समर्थक भी न मिलेगा । मालवीय जी का तपस्वी जीवन हम सब के लिय आदर्श है ।



जन्म - इलाहाबाद , 25 दिसंबर 1861 
निधन -काशी, 12 नवम्बर 1946 

महात्मा गांधी


महात्मा गांधी

         बच्चो के प्यारे बापू।

         महात्मा गांधी को आज दुनियाँ  का सबसे बड़ा आदमी माना जाता है।
         सत्य और अहिंसा के बल पर उन्होंने भारतवर्ष की स्वतंत्रता प्रप्त की। 
         "सदा सच बोलो ' और  'किसी का मन न दुखाओ '- यही उनका मंत्र था। 
         महात्मा गांधी का पूरा नाम था - मोहनदास कर्मचन्द गांधी। 
         गुजरात में स्कूल शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने विलायत जाकर बैरिस्टरी पास की। 
         महात्मा गांधी की पत्नी का नाम - कस्तूरी बाई।  वे भी गांधी जी तरह ही दयावान और सरल थी। 
       
          गांधी जी ने अंग्रेजो के जुल्म से तड़पते भारतवासियो को संगठित किया। आजादी की लड़ाई लड़ी।  कई बार जेल गये।  और उनके नेतृत्व में बिना हथियार की लड़ाई लड़ कर ही जनता ने अंग्रेजो को भारत से निकल दिया।  अंग्रेजो से गांधी जी बत्तीस साल तक लड़ते रहे।  बीच में कई बार उन्होंने अपनी जान की बाजी भी लगा दी थी। सन 1947 में देश को आजादी मिली और सन 1948 की 30 जनवरी को एक पागल ने गांधी जी की हत्या कर दी। 
गांधी जी अमर हो गए।

जन्म  - पोरबंदर (गुजरात ) 2 अक्टूबर 1869 
निधन - दिल्ली ,  30 जनवरी 1948

Dr. Zakir Husain Khan


 डा० जाकिर हुसैन
          डॉ. ज़ाकिर हुसैन स्वतंत्र भारत के तीसरे राष्ट्रपति थे। डॉ. राधाकृष्णन के बाद आप देश के सर्वोच्च पद के अधिकारी हुए ।
         सीधे-सादे, सरल स्वभाव, सरलता की मूर्ति और सादगी के प्रतीक डॉ. ज़ाकिर हुसैन बड़े विद्वान, शिक्षाविद और देशभग्त थे । 

dhimansumit73@gmail.com
         आपका जन्म आंध्र प्रदेश के हैदराबाद शहर मेँ हुआ था। परन्तु आप के जीवन का प्रारंभिक भाग उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में बीता। आप की प्रारंभिक शिक्षा भी फर्रुखाबाद और इटावा में हुई तथा अलीग़ढ विश्वविद्यालय से ऍम० ए० पास किया। बाद में उच्च शिक्षा हेतु आप जर्मनी गए और बर्लिन  विश्वविद्यालय से "डाक्टरेट " प्रप्त  की।  बाद में तो कलकत्ता, दिल्ली, अलीग़ढ, इलहाबाद और काहिरा (मिश्र ) के विश्वविद्यालयों  ने भी आपको  'डाक्टर ' की उपाधि देकर सम्मानित किया। 
          आप पर गांधीजी का बहुत गहरा प्रभाव था। उन्हीं की प्रेरणा से 'बुनियादी शिक्षा' पध्दति आपने चलाई और देश से निरक्षता का उन्मूलन किया।  आप  अलीग़ढ विश्वविद्यालय के उपकुलपति भी थे। 

          सन 1957 में आप बिहार के राज्यपाल नियुत्त हुए और सन 1962 में उपराष्ट्रपति निर्वाचित हुए, फिर सन 1967 में भारत के तृतीय राष्ट्रपति चुने गए। 

          सन 1963  में भारत सरकार ने आपको 'पदम् भूषण ' की उपाधि दी। 
          आप को पुस्तकों, फूलों और बच्चों से बहुत प्रेम था। 

जन्म --हैदराबाद, 8 फरवरी 1897  
निधन --दिल्ली , 3 मई 1969  

Pandit Jawaharlal Nehru

पं०  जवाहरलाल नेहरू  स्वर्गीय पंडित  जवाहरलाल नेहरू भारत के प्राण कहे जाते थे। अमीर घराने के एकलौते सपूत , अमीरी का ठाट -बाट, बहुत ऊँ...