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पं० मदनमोहन मालवीय


पं० मदनमोहन मालवीय 

          महामना पंडित  मदनमोहन मालवीय का चित्र देखो।  यह एक आधुनिक ऋषि की तस्वीर है ।  इसी से महात्मा गांधी उन्हें अपना गुरु और  बड़ा भाई मानते थे ।
         मालवीय जी के जीवन से हमें लगन, परिश्रम व किसी कार्य के प्रति निष्ठा द्वारा सफलता का उपदेश मिलता है ।
         मालवीय जी का बचपन इतनी गरीबी में बीता था की पाठशाला की फीस भी वे समय से नहीं दे पाते थे ।  और जितने कष्ट व परिश्रम से उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की, वह उनको लगन व निष्ठा तथा कर्त्तव्य के प्रति सच्चाई का ही नमूना है । उन्हें अनुभव था कि भारतवर्ष के अधिकांस अच्छे विधार्थी गरीबी के कारण नहीं पढ़ पाते इसीलिए उन्हेंने कशी हिंदू विश्वविदालय की स्थापना की, जो आज सारे संसार के अच्छे विश्वविदालयों में मन जाता है ।
         कशी हिंदू विश्वविदालय के निर्माण में ही उन्होंने अपना सारा जीवन लगा दिया । एक व्यक्ति द्वारा इतनी बड़ी दूसरी संस्था और कहीं नहीं बनी ।
         मालवीय जी से बड़ा देशभग्त भी दूसरा न मिलेगा।  राष्ट्रभाषा हिंदी का उन जैसा दुसरा प्रेमी व समर्थक भी न मिलेगा । मालवीय जी का तपस्वी जीवन हम सब के लिय आदर्श है ।



जन्म - इलाहाबाद , 25 दिसंबर 1861 
निधन -काशी, 12 नवम्बर 1946 

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