सरदार पटेल
सरदार पटेल हमारे राष्ट्रीय आन्दोलन के सबसे वीर नेता थे। बात -चीत, रहन-सहन , शक्ल - सूरत में पूरे योद्धा। गंभीर , लोहे की मूर्ति जैसी शक्ल। लगता था कि हिमालय की सबसे मजबूत चट्टान काट कर सरदार पटेल का शरीर गढ़ा गया था।महात्मा गाँधी के वे बड़े विश्वासी सहयोगी थे। सत्य और राष्ट्र -प्रेम के लिए जान की बाजी लगाने वाले सरदार वल्ल्भ भाई पेटल जैसा दूसरा 'लौह पुरुष ' और न मिलेगा।
ये भी बैरिस्ट्री छोड़ कर राष्ट्रीय आन्दोलन में आये थे। इन्हें लोग गुजरात का शेर कहते थे। बारदोली सत्यग्रह की सफलता पर गांधी जी ने इन्हें 'सरदार ' की उपाधि दी थी। फिर तो वे जनता के सरदार ही हो कर रहे।
देश में जब तक आजादी की लड़ाई चलती रही और आजादी मिलने के बाद भी जब भी देश पर कोई संकट आता और राजेन्द्र बाबू व पं० नेहरू जैसे नेता भी क्षण बर को चिंतित हो उठते तब केवल सरदार पेटल की योद्धा - वृत्ति ही काम आती।
ऐसे वीर नेता को देश कभी भूल नहीं सकता।
जन्म -कैरा (गुजरात ),३१ अक्टूबर 1875
निधन -दिल्ली, 15 दिसम्बर 1950
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